True Love Love Shayari

स्पर्श कुछ यूं हुआ है तेरी रूह से… कस्तूरी भी फीकी है तेरे ख़ुशबू ए इश्क़ से।

बनकर चाय तेरे होठों तक आने की तलब है,एक एक घूंट के साथ तेरी रूह में समाने की तलब है,मदहोश हो जाऊ तेरी बाहों में इस तरह तुझे पाने की तलब है।

एक रोज उसे मोहब्बत की निशानी दूंगा। पहला तोहफ़ा उसे, पायल खानदानी दूंगा।

कभी तो शाम ढले अपनी आँखों में सँवर जाने दे,मेरे सनम तेरी चाहत में मुझे बिखर जाने दे… तुझे तकता रहूं फ़क़त और कोई काम ना हो,इश्क़ में तेरे मुझे हर हद से गुज़र जाने दे..!!!!

मिल जाता है सुकून उनकी तस्वीर देख कर,कुछ शख्स हमारी जिंदगी में ऐसे भी होते है….

हर एक के पसंद के मुताबिक़ नहीं है हम, कड़वे जरूर है मगर दो मुखी नहीं है हम…

एक वक्त के बाद हर कोई गैर हो जाता है, उम्र भर किसी को अपना समझना बस वहम है…!!

तलव ऐसी की दिल ओ जान मे बसा लू तुमको,  नसीब ऐसा की दीदार भी मयस्सर नहीं तेरा….

अभी तो कलम से ही तो दिखलाई है हमनेमोहब्बत रूबरू जिस दिन मिलेंगे अंदाज-ए-इश्क़अलग होगा।

ना खूबसूरत ना अमीर,ना शातिर बनाया है, उस रब ने मुझे तो बस आपकी खातिर बनाया है।

मजबूर कर देते है लिखने के लिए,उफ़्फ़..तेरे ख़याल तेरी ही तरह ज़िद्दी हैं…!!

मेरे आसुं नही थम रहे के वो मुझे जुदा हो गया,और तुम कह रहे हो छोड़ो  यार अब ऐसा क्या हो गया…

ना जाने क्यों मुर्शिद, मगर जी चाहता है…..वफ़ा को आग लग जाएं, और मोहब्बत भाड़ मे जाएं…

क़हर है मौत है क़ज़ा है इश्क़, सच तो यूँ है बुरी बला है इश्क़…असर-ए-ग़म ज़रा बता देना, वो बहुत पूँछते हैंक्या है इश्क़..

माना की तुम्हें, Dp, story aur status में नहीं लगा सकते,पर यक़ीन मानो तुम्हें जहां भी रखा है बहुत महफ़ूज़ रखा है ..!

वो शक्स एक रोज़ मुझसे सवाल कर बैठा,के मुर्शिदमरने की धमकी दे कर,ये मनाने का तरीका कहा से सीखा…

जानती हुं के सारी बात मुकदर् की है,और मुर्शिदहमारे मुकदर् में शायद उनके खुदा ने हर खवाईश् का जनाजा ही लिख रखा है…

मैं वाजिफो से आई हु उसे शेहरे ए मोहब्बत में,मुर्शिदवरना वो किसी की बातों में तो आने से रहा…

छोटी ही उम्र में अल्लाह वज़ीफ़ा इतनाअभी क्या सिन है जो पढ़ते हो बला की तस्बीह

ये चाँद को तोड़ कर जोड़ने वाले,ज़रा हम पर भी गौर कर हम तो टूटी हुए किस्मत ले कर बैठे हैं,

मैं क्यो किसी और को देख कर जलुगीं,हय् मुर्शिदमैं तो खुद इतनी प्यारी हु…

ना नीम, ना हकीम, ना किसी आलिम से हल होंगे,ये मेरे दिल के मसले हैंमुर्शिद…. उसी जालिम से हल होंगे….

तुझे तरतीब में कैसे रखें हम,तेरी भरमार होती जा रही है

मेरी ख्वाईश है के तुम मुझे ऐसे चाहो,मुर्शिदजैसे कोई दर्द मे सुकून चाहता हो,

इश्क़ में हर लम्हा ख़ुशी का एहसास बनजाता है,दीदार-ए-यार भी खुदा का दीदार बनजाता है,जब नशा मोहब्बत का हो तो आईना भी ख्वाब बन जाता है।

उनपे रफ्ता रफ्ता हम मरने लगे,ज़रा ज़रा करते करते,बेपनाह प्यार करने लगे।।

गलती से भी ना गलती करना तुम,जब इश्क की गलियों में चलना तुम,इश्क किया है तो सिर्फ इश्क करना तुम,और कुछ की भी गुंजाइश न छोड़ना तुम ।।

तुम्हारे सर्द  रवैया से साफ़ लगता हैं,हमारा साथ ज़ुरूरी नहीं सफ़र के लिए,कही पर बैठ कर पीते हैं चाय का एक कप,उसके बाद बिछड़ते है उम्र भर के लिए ….

मैं अपनी मोहब्बत शिद्दत से निभा रहा हूँ ,आजकल मैं तुझे ख़्वाबों में चाह रहा हूं…!!

अगर जान जाओ तुम मेरी अज़ीयततो यकीन् मानों मुर्शिद तुम्हें मेरी हँसी पे तरस आए…..

कुछ चलता ही नहीं तेरे सिवा ,तू मेरी आधारकार्ड हो जैसे.!!

मेरे दिल की आरजू है कि हम तुम्हें इस कदर देखा करें,बस तुम ही तुम मेरे सामने रहो हम जिधर भी देखा करें…!!

फिर से बेताब है मोहब्बत की दहलीज़ पे जाने को,कमबख़्त ये दिल आमादा है फिर से बर्बाद होने को।

जगह जगह मुह मारने वाले कहीं के नहीं रहते,फ़िर चाहे वो मर्द हो या औरत….. मैं अपने बेटे को शिखाउगी,मोहब्बत मे वफा़ करना…के मुर्शिदअगर किसी से मोहब्बत हो जाए..तो उस लड़की से निकाह करना…..ज़िंदगी की पहली ख्वाईश होनी चाहिए….

उसके सामने सब फीका है, जो भी उसकी तारीफ़ मे कह सकूँ,मैं सबसे दूर रहती हु ताकि उसके करीब रह सकूँ…

इतनी सी बात पर मैं उसे छोड़ दूगी क्या…वो लाख किसी गेर का ही सही,मगर मेरी जान तो है….

खुदा किसी को इतनी खुदाई ना दे,के खुद के सिवा कुछ दिखाई ना दे….

जिससे पे बीतती है बस बही जानता है,के मुर्शिद….अब ये दिल तस्सलियों से कहा मानता है…

ज़माने पे भरोसा करने वालों,सुनो….भरोसे का जमाना जा रहा है….

आप जैसा चाहेंगे मैं बैसी बन जाउंगीमुर्शिदबस आप वादा करें कभी तन्हा छोड़ कर नहीं जायेगे…

उससे कहना मेरी सज़ा मे थोड़ी कमी कर दे,मुर्शिद…आदतन मुजरिम नहीं हु,बस गलती से इश्क़ हुआ था…

Ye इतनी cuteness तुम्हारी ही है या उधार ले कर आते होमरी ही जायेगे किसी दिन तुम पर …थोड़ा तो मेरा ख्याल किया करो,

ख़्वाबों से इश्क़ है मुझे,और तेरे इश्क़ से है,हर ख़्वाब मेरा…!!

हमें पायल बहुत पसंद है…..मुर्शिद,आप कभी मुझसे पहने का पूछते क्यो नहीं…

और कुछ बेटियां अपने दिल का कतल कर सकती है……अपने हाथो से ही अपनी चाहत को दफ़न कर सकती हैं…

खुद पे बीती है तो रोते हो,सिसकते हो,मुर्शिद वो जो हमने किया था,क्या इश्क़ नहीं था?

सुकून चाहते हो तो,ताल्लुक़ कम रखो।।

इश्क़, मोहब्बत, प्यार वादे , किस्से,सब खत्म हो जाते है,मुर्शिदजब वालिद कहते हैं, हमें मालूम है हमा बच्चे हमा मान नहीं तोड़ेगे,

हम एक जैसे ज़िदी थे,जानते थे, बिछड़ गए तो राफ़्ता ना होगा…

कुछ दिनों से तेरी आवाज़ नहीं सुनीके मुर्शिदकुछ दिनों को मैं सदियाँ सुमार करती हूँ…

मुझे नाज़ है उसकी परवरिश पर और अपनी पसंद परवो गुस्से मे भी बात करने की तमीज़ नहीं भूलते…

कोई समझे तो एक बात कहु,इश्क़ तौफ़ीक है गुनाह नहीं…

के मन्नते अधूरी रह गई,हय मुर्शिदचाहने वाला माज़रत  कर गया….

कुर्बानी के दिन चल रहे है ,कोई हमें पर भी कुर्बान हो जाओ….

ये दोस्त हमने तर्क ए मोहब्बत के बाबाज़ुद्महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी

मुझसे कल वक़्त पूछा किसी नेकेह दिया के बुरा चल रहा है….

मुझे करनी है कई राज़ की बाते तुमसे..क्या ख़्वाब के अलावा कहीं मिल सकते है हम?

मैं पागल नहीं ज़िद्दी हु , और ज़िद्दियों का कोई अस्तपताल नहीं होता…

तू जो अपनी आंखों में मय़खाना सजाए बैठी है,हर शख्स को अपना दीवाना बनाए बैठी है।।

दिल की धड़कन बन कर दिल मे रहोगे तुम,जब तक सांस है तब तक मेरे साथ रहोगे तुम।

बेनाम मोहब्बत,दिल में दबा रखी है,तेरी चाहत, सपनों में सजा रखी है…!!ये दुनियाँ बदले,पर तुम ना बदलना,ये उम्मीद सिर्फ तुमसे लगा रखी है!!

उसकी एक ख्वाईश के लिए बर्बाद हो,उसका नाम तो हो पर मेरे बाद हो,उसे भी तो समझ आए दुःख मेरा,ये खुदालड़की उसकी पहली औलाद हो….

हम लड़किया समझती नहीं है,लेकिन सच तो ये है….मर्द अपनी पसंदीदा औरत को छूने वाली हवा का भी दुश्मन होता है…..

मैं आपका ही तो मसला हुमुर्शिदहमको सोचिये और हल निकालिये ना..

थाम लेना कुछ देर कभी यूँ भी,गर्म हथेलियाँ भी कई मर्ज की दवा है….!!

बेसबब नहीं महकते हैं अल्फ़ाज़ मेरे,इनमें खुशबू है बसी तेरे ख्याल की..!!

दुनिया में बदतरीन भीख मोहब्बत की होती हैं,और मुर्शिदहमने एक शक्स से  वो भी मांगी थी…..

इस तरह उसकी जुस्तज़ु है मुझे,जनवाजैसे दुनिया में  आखरी शक्स है वो…

बेक़दरी करने वालों को अपना साया भी  मुयासिर् ना होने दोफ़िर चाहें वो रोए, चिलाए, तड़पे या फ़िर मर जाए…

यू भी हम दूर दूर रहते थे,यू भी सीने में एक कदूरत् थी…..तुमने रसमन भुला दिया वरना,इस तकलुफ् की क्या ज़ुरूरत थी….

ना कोई वादा ना कोई सजदा,फिर भी इस दिल को तुझपे इतना यकीन क्यूं हैं,तेरे इंतजार मे भी इस दिल को इतना सुकुन क्यूं हैं.!!

मुर्शिद गौर से देखो मुझे और फ़िर कहो,कैसो कैसो को खां गई मोहब्बत….

किसी के लिए मामूली रहावजूद मेरा,कोई आज तक दुआओं मेंमाँगता है मुझे ।

डाक्टर हकीम या किसी बाबा का जोर नहीं चलेगा,ये इश्क़ है जनाब उसकी जगह कोई और नहीं चलेगा.!!

जब उसकी ज़िंदगी में कोई और आ गई,तब मैं अपना ही शहर छोड़ आई…..

तुम्हारी निगाहों में देखा तो जाना,यहीं है ठहरना यहीं है ठिकाना।

हमारी कहानी  हमी  को पता है,बर्बाद जवानी हम ही को पता है,सबको पता है हम ज़िंदा है मग़रकैसे है ज़िंदा हम ही को पता है……

मेरी अधूरी कहानी कीमुकम्मल दास्तान हो तुम…खाली पड़े दिल के मकान केखुबसूरत मेहमान हो तुम…

प्यार को प्यार से लिखना अच्छा लगता है,इश्क़ करने से ज्यादा ज़ेहन में रखना अच्छा लगता है ।

तो क्या ये तय है तुझे उम्र भर नहीं मिलना,तो फिर ये उम्र ही क्यों तुझ से अगर नहीं मिलना.…

दिन छोटे और रातें लंबी हो चली हैं,मौसम ने सपनों का वक़्त बढ़ा दिया है…

इश्क में सुकून कहाँ सिर्फ बेकरारी ही बेकरारी है,हिस्से में कभी हमारे तो कभी तुम्हारी बारी है !!!

ये जूनून ये इश़्क बना रहे मेरा,दिल तुझ परही फ़िदा रहे,ना हो फ़िक्र किसी जहान की ना ज़ेहन में कोई तेरे सिवा रहे।

मेरे पास जादू है शब्दो का,बिखेर दूँगा तो फ़िजा महकेगी..!!

हम इस लिए ही तो पलकें बिछाए रहते हैं,बहुत अज़ीज़ हो तुम हम को शायरी की तरह।

जज्बातों में ढल के यूं दिल में उतर गया,बन के मेरी वो आदत,अब खुद बदल गया!!

इश्क़ का रिश्ता बंधा है तुमसे,मेरी ज़िंदगी का हर किस्सा जुड़ा है तुमसे,तुमसे ही हमेशा जुड़े रहते हैं मेरे हर लम्हे के ख़याल,मेरी ख्वाहिशों का आशियाना सजा हैतुमसे ।।

तेरे इश्क़ में भी,ठंड जैसी मजबूरी है,कितना भी बचूं,पर लगना जरूरी है…!!!!

मैं मोहब्बत के इरादे से नही आया हु,मैं फ़क़त शेर सुनाऊंगा और चला जाऊंगा…!!

उफ्फ कैसे मैं ताल्लुक़ छिपा के रखूं,उफ्फ! उस लड़की की बातें है बताने वाली ..

जब लहजे बदल जाएं तो वज़ाहतें कैसी,नए मयस्सर हो जाएं तो पुरानी चाहतें कैसी।

देखो तुम्हारी अना ने क्या कियाकिसी ने मोहब्बत करनी छोड़ दी….ये दोस्त…मैंने इजहारे ए इश्क़ क्या कर दियाअपने तो कदर ही करना छोड़ दि…..ये दोस्त…

मेरे रहते तो मेरा ख्याल तुमको कभी नहीं आयाये दोस्त…..अब रखना ख्याल तस्वीरों का….बंदा सारी उम्र उन्ही के सहारे गुजार देये दोस्त…..हुसन् ऐसा बेमिसाल तस्वीरों का…..

तुमने जबसे अपनी पलकों पर रक्खा,कालिख को सब काजल काजल कहते हैं ।

तुम ही तुम बिखरे हो मुझमे,मेरी रूह से मेरी सांस तक….!!

जिससे शिकायत है,उसी से मोहब्बत है,मतलब जो दर्द है,वही दवा है …!!!

सफा़ईयां जहर लगती है मुझे,अगर आपको बिछड़ना है तो खुदा हाफिज..!!

कैसे भूलेंगे हम उस चेहरे को,जिसने हर लम्हा नया चेहरा दिखाया हमें ।

बेहद सलीके से दिल तोड़ने का आदी है ,ये इश्क़ बड़ा सुलझा हुआ आतंकवादी है…!!

ख़्वाहिशों ने ही तो भटकाएं हैंजिंदगी के रास्ते,वरना रूह तो उतरी थी ज़मीं पेमंजिल का पता लेकर !

सुनो बहुत खूबसूरत हो तुम-नजरो में भरूं या बाहों में….

ज़मीं ख़ाली नहीं किसी के दिल में,मकाँ मोहब्बत का बनाऊं किस जगह।।

दिल में तुम्हारी यादें,बंद जुबां पर तुम्हारा ही जिक्र हैबेहद कशमकश में है दिल,ये इश्क है या फिक्र है।

तेरी चाहत में क्यूँहद से गुजर रहे है हम,इतना तो जीये भी नहींजितना तुम पर मर रहे है हम….!

तुम खास ही नहीं, हर सांस में हो,बेकरार दिल यूही नहीं, तुम हर एहसास में हो..!मिलोगे ये पता नहीं, मगर हर तलाश में हो,तलाश पूरी हो ना हो, मगर हर आस में हो..!!

प्यार में सब कुछ लुटाना आयेगा,जीतकर भी हार जाना आयेगा,टूटकर चाहोगे तुम जब भी किसी कोदर्द में भी मुस्कुराना आयेगा”

वो मेरे करीब नही तो क्या,उसके सबसे ज्यादा पास तो मैं ही हूं ना।

तू होगा मुझे पसंद हद से ज्यादा तो भी क्या,मेरा ज़मीर कहता है पलट कर भी न देखूं तुझे।।

खींच लाई है मोहब्बत तेरे दर पर मुझ को,इतनी आसानी से वर्ना किसे हासिल हुआ मैं ।

गहरे रंग से इश्क़ लाज़मी है,चाहे वो काला काजल हो या कड़क चाय..!

तुम लफ्ज़ बन कर समाये हो मुझमें,अब कागजों पे उतरे हो स्याही बन कर…!!

नसीहतों औऱ तजुर्बे हम भी लिखेंगे,अभी उम्र ए मोहब्बत है मुझे इश्क लिखने दो।

दिल ने पाई राहतें कम हुए कुछ गम,जब से मेरी जिंदगी में आ गए हो तुम।।

नजरंदाज उसे करूंजो नजर के सामने हो..उसका क्या करूं,जो दिल में बस गया है।

तुम झूठ हो तो लोग तुम्हें सर चढ़ाएंगे,तुम सच हो तो किसी की ज़रूरत नहीं हो तुम ।

वो भी किस्तों में दिखाती है मुझे अदाएं अपनी,मुर्शिद वो होने भी नहीं देती मुझे पूरा पागल।।

उस का मुझ पर जो हैअसर देखिये,मैंने लिखा है उस कोपढ़ कर देखिये ।

हमे मालूम था अपनी दिल्लगी का नतीजा,तभी मोहब्बत से पहले शायरी सीखी थी हमने…. !!

तुम्हारे साथ किसी मंजिल की तलब नहीं है,बस जहाँ तक राह चले ,हमसफ़र बने रहना…!!

छुआ हुआ हूं कई बार तेरे हाथों से,ये मेरे पास तेरी आखरी निशानी है….

वो एक शख्स मेरे ख्यालो मे बार बार आता है,शायद वो भी मुझे बेपनाह चाहता है,करनी तो हैं हमको एक दुसरे से ढ़ेर सारी बाते,पर ये मन ना जाने क्यो बेवजह नाराज़गी दिखाता है।

कहीं रूह का होता है,कहीं जिस्म होता है,इस जहाँ में इश्क़ भीदो किस्म का होता है।

किस कदर तेरी चाहतों को हम अपने पास लिए बैठें हैं,तू नही है मेरा फिर भी हम तेरी आस लिए बैठें हैं।

बेहद खूबसूरती है तेरी यादों के किस्सों में,सिर्फ तुम ही तुम हो मेरे हर एक हिस्से में..!!!

उतर तू भी किसी रोज़ रूह में मेरी,जैसे रोज़ उतरते हैं आँखों में ख़्वाब तेरे…!!

कभी सुकून की चुस्की ,तो कभी उलझन का किस्सा है।चाय सिर्फ चाय नहीं ,हमारी जिंदगी का हिस्सा है॥

ख्वाईश बस इतनी हैं किकुछ ऐसा मेरा नसीब हो,वक्त चाहे जैसा भी हो,बस तुम मेरे करीब हो।

कुछ देर की शायरी नहीं,ज़िन्दगी भर की कहानी हो तुम..!!

ऐसे याद आकरबेचैन ना किया करो,ये सितम ही काफी हैकि बहुत दूर हो तुम।

उनसे नज़र हटाकर कैसे जिए कोई,छलकी हुई शराब है कैसे पिए कोई,जीने की आरज़ू पहले थी अब मगर,मरने को बेक़रार है उनके लिए कोई।।

बहिश्त (स्वर्ग) हो या फिर ज़मीं हो, लाऊँ कहाँ से जो इतना हसीं हो,तुमको ही कर दूँ मुकाबिल तुम्हारे,तुम से हो बेहतर तो बस तुम्हीं हो..!

उसे इश्क़ किसी और से था,पर मेरा शिद्दत से चाहना पसंद था उसे।

उस का मुझ पर जो है असर देखिये,मैंने लिखा है उस को पढ़ कर देखिये ।

तुम्हें देख कर लगता है,तुम्हारे अलावा कुछ ना देखू….!

गजल में इश्क लिखते है,तो चाहत साँस लेती है…हमारी धड़कनो में खुद आपकीमुहब्बत साँस लेती है।

हम दोनों को कोई भी बीमारी नहीं है,फिर भी वो मेरी,मैं उसकी दवा हूँ..

रूठ जाने की सदी अब गुज़र गई,अब नज़र अंदाज़ करने का ज़माना है ।

तुम्हें इतना जो भाते हैं तुम्हारे कान के झुमके,चलो हम भी हो जाते हैं तुम्हारे कान के झुमके..!

तुम न मिल पाए तो शिद्दत से ख्याल आने लगा,हाय उन लोगों की तकलीफ़ जिन्हें हम न मिले!

आज तेरा ख्याल बड़े ही दिलचस्प मोड़ पर आया है,लबों पर सजा है तेरा नाम और आंखों में इश्क़ उतर आया है ।

किस्मत से अपनी सबको ,शिकायत क्यों है…!जो नहीं मिल सकता उसी से ,मोहब्बत क्यों है…!कितने खड़े है राहों पे फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों है…!!

हमारे प्यार की तुमको कहानी याद आयेगी,मिले दरिया जो सागर से रवानी याद आयेगी..!!कभी तुमने दिया हमको कभी हमने दिया तुमको,पलटकर देख लेना वो निशानी याद आयेगी..!!

किसी के उतने ही रहो,जितना वो तुम्हारा है।

जुबां से बयान हो तो तौहिन ए मोहब्बत है…महबूब का मतलब है के निगाहों को पढ़ ले !!

कुछ नहीं चाहा था उसे छोड़कर ,सबकुछ मिला बस एक उसे छोड़कर..!

पत्थर में एक ही कमी है की वह पिघलता नहीं,लेकिन यही उसकी खूबी है वह बदलता भी नहीं।

चाय सी तासीर है मोहब्बत की,हड़बड़ी में जला देगी ,चुस्कियों में मजा देगी ।

वो दिल दुखा कर भी सही‍हम सब सह कर भी गलत

उन दोनो ने ही अपने अपने रास्ते चुन लिए…एक ने बाप की इज्जत रख ली,दूसरे ने  पहले वाले के फ़ेसले का मान…..

शायर हूँ तो ग़मों से क्यों करूँ परहेज़,हालात् जितने नाज़ुक मेरी कलम उतनी ही तेज़….

उस से पूछो आज़ादी रास्तो की,जिसका साथी रास्ते में बिछड़ा हो…….

उदासी देख उसकी मन घबरा रहा मेरा,ना जाने इश्क़ कर उसे खुशी दी या बिनवजह गम ईनाम दिया है मैंने…… उसे

मैं खुद उलझी हु अपनी कहानी में,मैं कहा से किसी किस्से का किरदार बनू…

मेरा ये इश्क़ सलामत रहेगा,तुम्हारा हुस्न दिलनशी रहे या ना रहे ..!!

वो पेंसिल सी उसकी सारी गलतियां माफ,मैं कलम सा हर गलती पे खड़ा हूं कटघरे में !

काश फिर मिलने की वजह मिल जाए,साथ जितने भी बिताये वो पल मिल जाए,चल अब अपनी आँखें बन्द कर ले,क्या पता ख्वाब में गुजरा हुआ कल मिल जाए।

बस यही गुमान बस यही गुरूर रहता है,तू जुदा ही सही पर दिल में रहता है।।

कोरे कागज सी इस जिंदगी पर जो भी लफ्ज़ उकेरे हैं…इनमें ज़िक्र सिर्फ उनका हैं जो मेरे ना होकर भी मेरे हैं।

हर बार उसी से गुफ़्तगू सौ बार उसी की आरज़ू,वो पास नहीं होता तो भी रहता है मेरे रूबरू।

दिल तो क्या चीज है हम रूहों में उतरे होते,तूने चाहा ही नहीं चाहने वालों की तरह ..!!

कभी लफ़्ज़ों में कशिश कभी शायरी में नशा,हुआ जो तेरा असर अब मुझे होश कहाँ…!!!

न जाने ये मोहब्बत हमे किस राह पे ले आयी है,उसे छोड़कर हर शख्स हमे गैर नजर आया है।

नहीं चाहिए कोई दूसरा ख़्याल,ज़हन में मेरे बसा है सिर्फ़ तू ही तू….♥️♥️

ज़रा ज़रा सा मुझमें मैं,वो बे-शुमार मुझमें है…वो एक ही तो शख़्स है जो बार-बार मुझमें है।

अहसास नहीं बदलते दूरियों के साथ,वो आज भी धड़कता है मेरी हर एक सांस के साथ।।

सुनो जाना,कभी तलाशो हमें तो…खुद मे जरूर तलाशना….यकीनन….!!तुममे बेशुमार मिलेंगे हम…

कहीं लगता ही नहीं दिल ,तुमसे दिल्लगी लगाने के बाद..!इंतजार तो इंतजार ही रहा ,तेरे आने से पहले तेरे जाने के बाद..!!

माना सांसों के लिए हवा,दिल के लिए धड़कन ज़रूरी है,मगर ये दोंनो यूँ हीं चलतीं रहें,इसके लिए तेरा होना ज़रूरी है।

हमारी शायरियों में है तारीफ़ एक चेहरे की,जिनकी मौजदूगी से महकती हैं शायरियां हमारी ..

आज फिर यादों ने दस्तक दी,और जहन में उनका चेहरा छा गया,कुछ बीते लम्हे छू गए फिर से,और ज़ुबां पे उनका नाम आ गया..!!

कह देता हूँ वैसे मेरा कहना नहीं बनता,इस दिल के इलावा कहीं और तेरा रहना नहीं बनता।।

अजनबी तो हम जमाने के लिए है,आप से तो हम शायरियो मे मुलाकात कर लेते है…!!!

हिंदी मुझे उतनी ही प्रिय है,जितनी की आपको मेरी शायरियां…..

उलझते-सुलझते हुए ज़िन्दगी के ये लम्हें,और खुशबू बिखेरता हुआ तेरा महकता सा ख़याल।

हमारी दास्तां उसे कहां कबूल थी,मेरी वफायें उसके लिये फिजूल थीं,कोई आस नहीं लेकिन कोई इतना बता दो,मैंने चाहा उसे क्या ये मेरी भूल थी..?

ऑंखें बंद कर जे़हन में झांक लेता हूँ,बिखरे बिखरे से हैं एहस़ास संवार देता हूंँ,खुशी गम चाहत नफ़रत सब जेवर हैं दिल के,कैसे उतार फेंकूं सो पन्नों पे वार देता हूंँ ।।

तुम उन खुशियों में खुश रहो,जो तुम्हें मेरे बगैर मिलती हैं,मैं उस हर लम्हें में खुश हूं,जिनमें तुम मेरे साथ होते हो…

इत्र की महक दामन में हो या ना हो,जज़्बात और अल्फ़ाज़ हमेशा महकदार होने चाहिए।

कोई सुकूँ की फरियाद करता है ,कोई जाँ जाने तक याद करता है,”इश्क़” के पास तरीके बहुत हैं ,ये तरह-तरह से बर्बाद करता है !!

जिक्र जब कोई जिन्दगी का करे,हम तसव्वुर में सिर्फ तुम्हें लाते हैं ।

कौन पढ़ता है बेवजह यूँ इन शायरीयों को,कोई इनमे अपना इश्क़ तो कोई अपना दर्द ढूंढता हैं !!

आफ़रीन-ए-क़मर है हुस्न उसका,तो ये गुमान लाज़िम है।

मोहब्बत तो मुसलसल बैचेनी है किसी के लिए,करार आ जाये तो तौहीन -ए-मोहब्बत है।

मैं हकीकत लिखूं या फसाना लिखूं,उसको ना देखने का बहाना लिखूं,बेतहाशा अगर है मोहब्बत उसे ,नाम उसके मैं एक जिंदगानी लिखूं।

ख़्वाहिश यही है कि सिर्फ़ मेरी निगाहों में रहो तुम,ग़ैर की नज़रों में तुम्हारा आना भी हमें गवारा नहीं।

अजब सी मिठास है उसकी ज़बां में,जाने क्या ख़ास है उसकी ज़बां में,वो बोलती है तो हम जी जी करते हैं,ये हम ही नहीं मियां सभी करते हैं।

एक दूजे की मुस्कुराहटों में रहते हैं,और कहीं अब ठिकाना नहीं हमारा।

आज कल रातों में ख़्वाब कम औरतुम ज्यादा आने लगे हो…!

वो सजती है सिर्फ तुम्हारे लिएउसकी तारीफ़ किया करो,काजल अगर थोड़ा ऊपर नीचे होउसे भी खूबसूरत कहा करो … ️

शायरी में लिखा ये अंदाज हमारा हैं,लेकिन लफ्जों पर चल रहा जादू तुम्हारा है।

रात और ख़्वाब कीजो मिलावट है,सच पूछो तो यहीं तोमोहब्बत की सजावट है ।

चूम के तेरे रुख़सार कोये हवाएँ जब चलतीं हैं,डूब जाता है फिर वो शहर नशे मेंये जिस शहर से भी गुजरती हैं।

जिस कदर खुश लग रहें हैं, हैं नहीं हम..यार तू तस्वीर बढ़िया खींचता है।।

मैं विकल्प तो नहीं कि किसी और के बाद याद आऊं,मुझसे पहले गर कोई हो बेहतर है मुझे भूल जाया जाये. .. .!!

रूह मे बसा हुआ शख्स,दिल से नही उतर सकता.!!

हमारा मसला ये है कि शाम होते ही हम खुद से थोड़ा फरार चाहते हैं,और पलटने वाले तुझे पहले ही बताया था कि मुर्शद किसी भी शक्श को हम सिर्फ एक बार चाहते हैं।।

कितनी तकलीफ है इस एहसास में….मुझे उसके इजहारे ,इश्क़ बिना ही मर जाना है….

नजरों का क्या कसूर जोदिल्लगी तुमसे हो गयी,तुम हो ही इतनी प्यारी किमोहब्बत तुमसे हो गयी।

वो एक शख्स अगर हिमायत करे मेरी…मैं दो जहां को बताऊं के इश्क़ क्या होता है!

इश्क़ करो तो बेहिसाब करो,मिलना बिछड़ना तो एक दिन ज़ाहिर है,जो बेइंतिहा चाहत से रूह मैं उतर जाये,सिर्फ़ वहीं मोहब्बत मैं माहिर हैं।

दूर खुद से बड़ी मुद्दत से कर रहे हो तुम,ख़ुश हूँ कुछ तो शिद्दत से कर रहे हो तुम॥

तुम रोज़ देते हो जीने के मशवरे,और खुद मुट्ठी में, मेरी जान लिए बैठे हो….

निखरी है मेरी मोहब्बत,तेरी हर आजमाइश के बाद!!सवरता जा रहा है इश्क,तेरी हर फरमाइश के बाद!!

कुछ तो बात है उसमें ग़ज़ल जैसी,जो भी उसको देखता है शायर बन जाता है।

शोर करने वाले अगर खामोश हो जाये तो …उनकी ख़ामोशी से सुकून नहीं खौफ आता है,

ज़ुरूरी नही कुछ बुरा करने पर ही दर्द मिले,हद से ज्यादा अच्छा करने की भी सज़ा मिलती हैं यहाँ….

हैरत करू, मलाल करू, गिला करूतुम गैर लग रहे होमुर्शदबताओ मैं क्या करूँ….

कहाँ चलता है आजकल का प्यार वर्षो तक..एक महीने में मिटा के जिस्म की प्यास मुँह फेर लेते है लोग”

मेरी उदासियाँ तुम्हें कैसे नज़र आएंगी ,तुम्हें देखकर तो हम मुस्कुराने लगते हैं…!!

तुझे क्यों लगता है के तू लाज़मी है,ना इश्क़ आख़री है ना तू आख़री है।

खूबसूरत तो पहले भी बहुत था वो,लेकिनहमने चाहा तों अजब ढंग से निखरा वो शख़्स ।

रात के दरिया का किनारा भी कभी आएगावक्त का क्या हमारा भी कभी आएगा,मेरे हिस्से में कभी आया था अच्छा कोई दिन,पूछना था के दोबारा भी कभी आएगा…

फिर किसी शख्स की आंखों ने मुझे खींच लिया,मैने हर बार मोहब्बत से बहुत तौबा की।।

वही चेहरा, वही आंखें,वही रंगत निकले,जब कोई ख्वाब तराशूं तेरी सूरत निकले…!!

उसी के चेहरे पे आँखें हमारी रह जाएं,किसी को इतना भी क्या देखना ज़रूरी है।

वो आ गये है अब तो मेरे इश्क में बरकत सी होने लगी है,चुपचाप था जो दिल मेरा अब उसमें हरकत होने लगी है…!!

जैसे मेरी निगाह ने देखा न हो कभी,महसूस ये हुआ तुझे हर बार देखकर ।

हजारों मौजूद विकल्पों के बीच,किसी एक को अनिवार्य बनाये रखना ही”इश्क़” है…

कि बिगड़ गए थे इश्क़ मे हम थोड़े बहुतदिल टूटा तो फिर दिल तोड़े बहुत…

ऐसे ना आप देखिये तिरछी निग़ाह सेमुर्शिदपरहेज कर रहे है,अभी हर गुनाह से…

एक कतरा ही सही आँख में पानी तो रहे,ऐ मोहब्बत तेरे होने की निशानी तो रहे…!!बस यही सोच के यादों को तेरी दे दी पनाह,इस नये घर में कोई चीज पुरानी तो रहे…!!

तेरी आँखों की कशिश कैसे तुझे समझाऊँ,इन चिरागों ने मेरी नींद उड़ा रक्खी है…!!!

वो बदलती ही जा रही हैं सूरते अपनी,मगर मैं चला रहा हूं काम एक तस्वीर से…!!!

किसी ग़ज़ल सा लगता है नाम तुम्हारा,देखो तुम्हें याद करते-करते हम शायर बन गए…

तेरे बगै़र मुकम्मल नहीं कोई महफ़िल,तेरा ख़्याल मेरी हर ख़ुशी में शामिल है।

अजब सी जादुगरी है,तेरी निगाहों में,मुझे भी उलझा दिया मुहब्बत की राहों में..

एक उम्र का पड़ाव है जहां इश्क़ का इजहार मुमकिन नहीं,बस मर्यादाओं में रहकर अपनी हसरतों को शायरियों में बयां करना हैं”

एक खौफ सा है कहने में,मोहब्बत बेइंतहा है तुमसे..

एक अदा से शुरू,एक अंदाज़ पे खत्म होती है…!नज़र से शुरू हुईं मोहब्बत,नज़रअंदाज़ पे खत्म होती है…!!

वो तो हर चाहने वाले पे फ़िदा लगता है,जाने किस किस का है जो मुझ को मेरा लगता है ।

दिल में जगह बनाने के लिए दिल तक जाना होता है..रिश्ते यू ही नहीं हो जाते खास इनको बेवजह निभाना होता है..

कोई काँटा न हो गुलाबों में,ऐसा मुमकिन है सिर्फ़ ख़्वाबों में,दिल को कैसे क़रार आता है,ये लिखा ही नहीं किताबों में ।

जो तुमको भा जाये उसपे तुम वाह वाह करो,मुझे तो अपने लिखे हर एक शब्द से बेइन्तहा मुहोब्बत है..!!

बाँध रखा है तेरे इंतज़ार ने मुझे वरना,हज़ारों मोहब्बतें आती हैं पास मेरे।

ज़िंदगी का कभी हिसाब करोचेहरे को खोल कर किताब करो,गुफ़्तगू से फिज़ा महक जायेअपने लहजे को यूँ ग़ुलाब करो।

रद्दी के भाव बिक गई वो लड़की,जो मुझे हर कीमत पर चाहिए थी।

ब्रेकअप तभी करें,जब आपके पास बैकअप हो..

तेरी चाहत का बरस रहा हैकुछ ऐसा सावन,बूँद गिरी दिल पे तो भीग गईधड़कन..

कहीं मैं देर से पहुंचू तो याद आता है…कहीं मैं वक्त से पहले भी, जाया करता था!

तेरी नज़रों में खुद के अक़्स को जाना है,मेरे हर जर्रे जर्रे ने बस तुम्हे अपना माना है…!!!

जिद मैं छोड़ सकता हूँ,पर लत तेरी छोड़ दूं कैसे..आपको चाहना आदत बन गई है मेरी,ये सिलसिला तोड़ दूं कैसे..

महफ़िल में जो हमे दाद देने से कतराते हैं….सुना है तन्हाइयों में वो हमारी शायरी गुनगुनाते हैं ।।

कहाँ जाऊँ तेरे दायरे से बाहर,खुद को महफूज किया है तेरी पनाहों में..!

वो और होंगे जो कपड़े उतारते है,हम वो हैं जो जुल्फे सवारते है।

मेरी धड़कनों की रवानगी,तेरा ही नाम दोहराती है,ये रहती तो है मेरे सीने में,पर सिफारिश तेरी लगाती है।

तेरी आवाज जख्म भरती है,ए मेरे मेहरबान बोला कर,नाम लेकर तो सब बुलाते हैं,तू मेरी जान,जान बोला कर।।

कमबख्त दिल भी बहुत साजिशे करता है,ठोकर कितनी भी खाये ख्वाहिश उसी की करता है।

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