Heart Touching Love Shayari in Hindi for Girlfriend

प्यार को प्यार से लिखना अच्छा लगता है,
इश्क़ करने से ज्यादा ज़ेहन में रखना अच्छा लगता है ।

तो क्या ये तय है तुझे उम्र भर नहीं मिलना,
तो फिर ये उम्र ही क्यों तुझ से अगर नहीं मिलना.…

दिन छोटे और रातें लंबी हो चली हैं,
मौसम ने सपनों का वक़्त बढ़ा दिया है…

इश्क में सुकून कहाँ सिर्फ बेकरारी ही बेकरारी है,
हिस्से में कभी हमारे तो कभी तुम्हारी बारी है !!!

एक हसीन सा एहसास बनाकर तुम ;
मुझे हर पल अपनी निगाहों में रखना !
छू ना सके मुझे ये बहकी सी हवाए ;
मुझे कैद ऐसे अपनी बाँहों में रखना !
मैं ख़ाक हूँ ,देखो बिखर ना जाऊं कहीं ;
मुझे समेट कर अपनी आग़ोश में रखना !

ये जूनून ये इश़्क बना रहे मेरा,दिल तुझ पर
ही फ़िदा रहे,
ना हो फ़िक्र किसी जहान की ना ज़ेहन में कोई तेरे सिवा रहे।

अपनी कलम में स्याही भर रहा हूं,
कविताओं में मैं तुझे लिख रहा हूं।
ख्यालों में तुझको बसा रहा हूं,
ख्वाबों में मैं तुझसे मिल रहा हूं।
तुझे अपनी रूह में उतार रहा हूं,
तुझसे बेइंतेहा इश्क कर रहा हूं।
जाने क्या क्या शगल कर रहा हूं,
खुद’को तुझे मैं अर्पण कर रहा हूं ।

मेरे पास जादू है शब्दो का,
बिखेर दूँगा तो फ़िजा महकेगी..!!

हम इस लिए ही तो पलकें बिछाए रहते हैं,
बहुत अज़ीज़ हो तुम हम को शायरी की तरह।

जज्बातों में ढल के यूं दिल में उतर गया,
बन के मेरी वो आदत,अब खुद बदल गया!!

इश्क़ का रिश्ता बंधा है तुमसे,
मेरी ज़िंदगी का हर किस्सा जुड़ा है तुमसे,
तुमसे ही हमेशा जुड़े रहते हैं मेरे हर लम्हे के ख़याल,
मेरी ख्वाहिशों का आशियाना सजा है
तुमसे ।।

तेरे इश्क़ में भी,ठंड जैसी मजबूरी है,
कितना भी बचूं,पर लगना जरूरी है…!!!!

मैं मोहब्बत के इरादे से नही आया हु,
मैं फ़क़त शेर सुनाऊंगा और चला जाऊंगा…!!

उफ्फ कैसे मैं ताल्लुक़ छिपा के रखूं,
उफ्फ! उस लड़की की बातें है बताने वाली .. ❤️

ख्यालों में तुम होती हो,
ख्वाबों में तुम होती हो,
चुपके से मेरी इन सांसों में,
तुम आकर महक जाती हो,
काँपते हुए मेरे इस दिल की,
तुम धड़कन बन जाती हो,
जिस पल भी निंद लेती है,
आगोश में मेरी आँखों को,
तो तुम बन कर एक सपना ,
मेरी इन पलकों पे सज जाती हो ।

जब लहजे बदल जाएं तो वज़ाहतें कैसी,
नए मयस्सर हो जाएं तो पुरानी चाहतें कैसी।

देखो तुम्हारी अना ने क्या किया
किसी ने मोहब्बत करनी छोड़ दी….ये दोस्त…
मैंने इजहारे ए इश्क़ क्या कर दिया
अपने तो कदर ही करना छोड़ दि…..ये दोस्त…

मेरे रहते तो मेरा ख्याल तुमको कभी नहीं आया
ये दोस्त…..अब रखना ख्याल तस्वीरों का….
बंदा सारी उम्र उन्ही के सहारे गुजार दे
ये दोस्त…..हुसन् ऐसा बेमिसाल तस्वीरों का…..

तुमने जबसे अपनी पलकों पर रक्खा,
कालिख को सब काजल काजल कहते हैं ।

तुम ही तुम बिखरे हो मुझमे,
मेरी रूह से मेरी सांस तक….!!

साँसो ने गुजारिश की है,
तुम मेरे पास आ जाओ,
हर एहसास के जर्रे में,
लम्हे में तुम समा जाओ,
बेजान सी धड़कनें है,
तेरी बाहों के सुकून के बिना,
आकर इस दिल को…..
अपनी धड़कनों से मिला जाओ।

जिससे शिकायत है,
उसी से मोहब्बत है,
मतलब जो दर्द है,
वही दवा है …!!!

कि अपनी नज़रों से उतारा है हमें,
उसी पे मरते हैं जिसने मारा है हमें,
तमाम दिये हैं मुझे उसी ने गम,
फिर भी जीना उस बिन ना गवारा है हमें,
मेरे वो पास नहीं है माना मगर,
उसकी यादों का ही सहारा है हमें,
उसका साथ है जैसे कश्ती कोई,
उसका साथ ही अब किनारा है हमें,
वो समझता नहीं इस बात को क्यों,
इस जहाँ में वो सबसे प्यारा है हमें,
ये जानता हूँ वो मिल सकता नहीं,
मोहब्बत उसी से मगर दोबारा है हमें।

मेरी आंखे तेरी तस्वीर से जा लगती हैं,
सुबह उठकर सब अख़बार नहीं पढ़ते है।

वापसी तुम पे फर्ज़ थोड़ी है,
ये मोहब्बत है कर्ज़ थोड़ी है!

बाखुदा तू कितनी खूबसूरत है,
तुझे हर रोज मैं लिख कर बताऊंगा,
ये चमकते तारे फ़लक में ही रहने दे,
तूझे मैं मेरी चाहत से रूबरू कराऊंगा।।

खिलते फूल जैसे लबों पर हँसी हो,
ना कोई गम हो ना कोई बेबसी हो,
सलामत रहे ज़िंदगी का यह सफ़र,
जहाँ आप रहो वहाँ बस खुशी हे खुशी हो……!!!

पन्ने पन्ने पर तेरी इबादत, तेरा फसाना, तेरी कहानी,
किताब जहाँ जहाँ से खोली, मोहब्बत तेरी ही निकली।

उसी के हुस्न उसी की अदा के बारे में,
फिर एक शेर उसी दिलरुबा के बारे में,
मैं उसके छूने से अच्छा हुआ बताता किसे,
सभी ने पूछा था मुझसे दवा के बारे में,
इसी ख़ता पे बुझाए गए चराग़ मेरे,
मैं जानता था बहोत कुछ हवा के बारे में।

महसूस करते हैं हर लफ्ज़ से पहले तुझे,
चंद लाइनें नहीं जज़्बात उतरते हैं यहां।

गुफ्तगु अच्छी लगी,
सलीका ए नज़र अच्छा लगा,
मुर्शिद
मुद्दतों बाद कोई हम सफ़र अच्छा लगा

अजीब बात है अब भी यकीं नहीं मुझ पे,
तुमा नाम पे तो ख़ुद को उजाड़ बैठे हैं,

बिगड़ गई तो आफ़त जैसी,
वरना काफ़ि काफ़ि सरीफ़ हु मैं…..


के मुर्शिद उदास होना मसले का हल नहीं,
हय मुर्शिद
अब अवगा करेगे और निकाह करेगे….

तुमको वो शक्स आम लगता हैं,
ऐसा करो….. के मुर्शिद
तुम मुझसे आँखे उधार ले जाओ…

वक़्त झुठलाता है हर एक नजरिये को एक दिन,
मैंने सोचा भी नहीं था तु एक दिन जुदा हो जायेगा,
सब खुदा पर छोड़ आया हु…मै उसको छोड़ कर,
दुःख बड़ा होगा तो दिल भी बड़ा हो जायेगा….

किसी गली में किराए पे घर लिया उसने,
फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे।

मैं भी तुम जैसा हूं अपने से जुदा मत समझो,
आदमी ही मुझे रहने दो ख़ुदा मत समझो,
ये जो मैं होश में रहता नहीं तुमसे मिलकर,
ये मेरा इश्क़ है तुम इसको नशा मत समझो,
रास आता नहीं सबको ये मोहब्बत का मरज़,
मेरी बीमारी को तुम अपनी दवा मत समझो।

वक़्त झुठलाता है हर एक नजरिये को एक दिन,
मैंने सोचा भी नहीं था तु एक दिन जुदा हो जायेगा,
सब खुदा पर छोड़ आई हु…मै उसको छोड़ कर,
दुःख बड़ा होगा तो दिल भी बड़ा हो जायेगा….

जिसकी ज़िंदगी के हिस्से में हो सफरनामे,
उसके हिस्से में घर नहीं आता,
ये मोहब्बत की एक खूबी है,
कोई ऐब नज़र नहीं आता,

खुश किस्मत हो की तुम किसी शायर की मोहब्बत हो,
अब वो तुम्हें पुरी उम्र अपने शब्दों से संवारते रहेगा..!!

क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था,
जिससे मिलकर मुझे,हर शख़्स बुरा लगता था।

मेरी आंखों में तुम दबी दबी सी रहती हो,
मेरे अश्कों में तुम छुपी छुपी सी रहती हो,
कहां तुम मुझसे एक पल भी दूर रहती हो,
तुम मेरे हर अहसास में बसी हुई रहती हो,
दूर होकर भी तुम’से कहां दूर रह पाता हूं मैं,
तुम तो मेरे दिल की हर धड़कन में रहती हो !!

मुझे अब नींद की तलाश नहीं,
अब रातों को जागना अच्छा लगता हैं…
मुझे नहीं मालूम की वो मेरी किस्मत में हैं या नहीं,
मगर खुदा से उसे मांगना अच्छा लगता हैं…
जाने मुझे हक हैं या नहीं,
पर उसकी अपनी जान से ज्यादा परवाह
करना अच्छा लगता हैं…
उससे प्यार करना सही हैं या नहीं,
पर इस एहसास को जीना अच्छा लगता हैं…
कभी हम साथ होंगे या नहीं,
पर ये ख़्वाब देखना अच्छा लगता हैं…
वो मेरा हैं या नहीं,
पर उसे अपना कहना अच्छा लगता हैं…
दिल को बहलाया बहोत पर मानता ही नहीं,
शायद इसे भी उसके लिए धड़कना
अच्छा लगता हैं…

तलब लगी है तुम्हारे
साथ चाय पीने की !
तुम चाय को देखना
हम तुम्हें देखेंगे ।

दूरियों का ग़म नहीं अगर,
फ़ासले दिल में न हो…!
नज़दीकियां बेकार है अगर,
जगह दिल में ना हो..!!

निगाहों से तुम्हारे दिल को एक पैगाम लिख दूँ,
मोहब्बत वफा का खुशनुमा अंज़ाम लिख दूँ,
मेरे लबो पर तुम गज़ल बनके चले आओ,
सातों जनम दिल की धड़कन तेरे नाम लिख दूँ।

पढ़ तो लिए हैं मगर अब कैसे फेंक दूँ,
खुशबू तुम्हारे हाथों की इन कागज़ों में जो है।

ज़रा भी नहीं देखेंगे किसी और को,
तुमको पाकर मतलबी हो जायेंगे हम..!!

मैं तेरी सांस हो जाऊं तू मेरा अल्फाज कब होगा,
सोचता मैं रहता हूँ हर पल तू मेरे पास कब होगा..!!
मेरे होंठो पर आयी इस मुस्कान को देखने वाले,
मेरे आँखों के आंसू का तुझे एहसास कब होगा..!!

कभी मिलने मुझे आओ तो मौसम आशिक़ाना हो,
शुरू हों प्यार के नग़्में ग़ज़ल भी सूफ़ियाना हो।
मेरी चाहत नही दुनिया की दौलत जीत लेने की,
तुम्हारे दिल में बस छोटा सा मेरा आशियाना हो।

जब लबों पर जगह नहीं मिलती,
लफ़्ज़ आँखों में रहने लगते हैं।

जाने यूं कैसे बयां करे हम इश्क ये नाजूकी कमबख्त,
ये फुर्सति मसले हैं यूं कतरा कतरा ही महकेंगे साहब……

वैसे इरादे क्या है तुम्हारे,सपने खुद के दिखाती हो,
बस सपनों में ही आने से कतराती हो..!

है उसकी हिम्मत मुझे भुलाये?
मैं साथ छोड़ू वो मर न जाये..
तुम्हे पता ही नहीं उसका,
मैं उसके सबसे करीब हूँ,
वो मेरे बारे में सोचती है,
मैं उसकी आँखों का नूर हूँ अब,
वो दिन में मुझसे है बात करती,
वो रात मुझे सपनों में देखती है,
मैं सबसे ज्यादा करीब हूँ उसके,
मैं उसको अंदर से जानता हूँ,
वो जब ये कहदे मैं तुम्हारी..
मैं आंख बंद करके मानता हूं।।😊
कैसा है?🤔

चाहत इतनी कि
तुम्हारी चाहत में मैं रहूँ,
जिद्द इतनी कि
उसमें सिर्फ मैं रहूँ…!

तेरे सिवा ज़माना पढ़ता है मुझे,
इक तेरे सिवा मैं किसी और को लिखता ही नहीं हूँ..!

मत पूछो कि मैं शब्द कहां से ला रहा हूँ,
तेरी यादो का खजाना है जो लुटाए जा रहा हूँ।।

नाराज़गी ख़त्म हो जायेगी,
रूठ जाने से क्या होगा,
याद तो फ़िर भी आएगी,
भूल जाने से क्या होगा,
रिश्ता तो फ़िर भी रहेगा,
छूट जाने से क्या होगा,
अगर साथ लिखा होगा,
जिंदगी के सफ़र में,
क़िस्मत फिर ढूंढ लायेगी,
दूर जाने से क्या होगा।

जो दूरी होगी,
लौट कर उसे आधा करना होगा,
जाने देंगे तुम्हें,
पर लौटने का वादा करना होगा,
दिल तो नही,
तुमसे बिछड़ने का,
लेकिन जितना प्यार करते हो,
उससे भी ज्यादा करना होगा।

कैसे बदलोगे मुझे
मैं सवेरा हुं,हर रात के बाद आऊंगा,
कैसे ठुकराओगे मुझे
मैं हकीकत हूं, हर ख़्वाब के बाद आऊंगा,
कैसे समझाओगे मुझे
मैं जवाब हूं, हर सवाल के बाद आऊंगा,
कैसे भुलाओगे मुझे
मैं याद हूं, हर मुलाकात के बाद आऊंगा,
कैसे संभालोगे मुझे
मैं सैलाब हूं, तूफ़ान के बाद आऊंगा।

कहीं दादी कहीं नानी से अलग कर दिए गए,
बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए,
कच्ची उम्रों में हमें काम पर लगा दिया गया,
हम वो बच्चे जो जवानी से अलग कर दिए गए,
पहले दुनिया ने सिखाया हमें तैराकी का फन,
तैरना आया तो पानी से अलग कर दिए गए।

खुशनुमा हो जाता है मेरा इश्क तुझे याद करने से,
महकता रहता है प्रेम मेरा तेरी फरियाद करने से।

फ़कत नाम लेने से दिल को सुकून हो जाता है,
तू है नहीं है सारा मसला फिजूल हो जाता है,
ज़िंदगी तेरी है तू जैसे चाहे जी ले हमें,
खुशी गम रोना हंसना सब हमें कुबूल हो जाता है।

ज़रा ज़रा सा मुझमें मैं,वो बे-शुमार मुझमें है…
वो एक ही तो शख़्स है जो बार-बार मुझमें है..

किसी ग़ज़ल सा लगता है नाम तुम्हरा,
देखो तुम्हें याद करते करते हम शायर बन गए.!!

दिल जलाने के सिवा जिसका हुनर कुछ भी नहीं,
हम ने उस शख्स को दिलदार बाना रखा है।💔

बिखरना भी गवारा हैं मुझें, तुम जो सवारते रहो,
बस इतनी सी चाहत है, तुम ऐसे ही चाहते रहो.!!

सर्द सवेरा,गर्म सांसे,ठंडी फिजाएं, जालिम हवाएं,
चाय तो ठीक है बस खुदा मोहब्बत से बचाए।

जो दूरी लिखूँ तो बेपनाह मोहब्बत बन जाना….
जो हसी लिखू तो मेरे होंठो पर ठहर जाना….
जब भी लिखू तुम्हे प्यार मैं अपनी कलम से….
बनकर इश्क़ तुम बस मुझमे सिमट जाना….❤️

मुझे तुमसे बस एक अमानत चाहिए,
तुमसे ज्यादा तुम्हारी मोहब्बत चाहिए,
कह दो तो ज़माने से बगावत कर लूं,
दिल में रहने की बस इज़ाज़त चाहिए।

जो लोग दिल मे उतरते हैं उन्हें संभाल कर रखिए,
और जो लोग दिल से उतर गए हैं उनसे संभल कर रहिए।

तू मुझ में समाया है..
फूल में खुशबू के जैसे,
दिल में धड़कन के जैसे,
आंख में तस्वीर के जैसे,
कलम में स्याही के जैसे,
संगीत में धून के जैसे,
रूह में सास के जैसे,
सच कहूं तो तुम हो तो मैं हूं,
तुम बिन मैं हूं
बस एक लाश के जैसे..!!

मुहब्बत फासलों में ही छुपी है शायद,
मिलने पर तो हर चीज़ आम सी लगती है।

क्यों मान लूं मैं “खुद” को तुमसे वंचित,
कि साथ रहना ही तो “पाना” नहीं होता।

तेरे चेहरे से हटे आँखे तो दुनियां देखूं,
सामने तू है, तुझे देख के अब क्या देखूं,
रात ख्वाबों में तेरी,
दिन तेरे खयालों में,
हर लम्हे सिर्फ तू है,
तुझसे अलग क्या देखूं!

इश्क की दुनिया के कायल सब हैं,
कोई बोलता है,कोई छुपाता है, मगर घायल सब हैं ।

चले आया करो ओनलाइन कहाँ गुम रहती हो,
कितनी बार कहें मेरी शायरियों का किरदार हो तुम ..!

हर किसी
के प्रेम की गजब कहानी है..!!
कोई मुकम्मल
तो कोई अधूरी निशानी है..!!
यहां कोई
बाजीराव तो कोई मस्तानी है..!!
पर ना जाने
कौन किसके दिल में है
और ना जाने कौन किसकी दीवानी है..!!
यहां हर किसी
के प्रेम की अजब- गजब कहानी है..!!

ठहरी ठहरी सी तबीयत में रवानी आई,
आज फिर याद मोहब्बत की कहानी आई,
आज फिर नीँद को आँखों से बिछड़ते देखा,
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई!
मुद्दतों बाद चला उनपे हमारा जादू
मुद्दतों बाद हमें बात बनानी आई!
मुद्दतों बाद पशेमाँ हुआ दरिया हम से
मुद्दतों बाद हमें प्यास छुपानी आई!

लफ्ज़ लफ्ज़ तेरी याद का मेरे जहन में दर्ज़ है…
तेरा इश्क़ ही इलाज़ है तेरा इश्क़ ही मर्ज़ है।

एक ही दर पे रहे दर नहीं बदला अपना,
ये बात अलग मुक्कदर् नहीं बदला अपना,
इश्क़ का खेल है शंतरंज नही है जाना
मात खाई है, मगर घर नहीं बदला अपना,
जाने किस वक़्त उसे अचानक याद आ जाए,
ये सोच कर मैंने नंबर नहीं बदला अपना…….

पहले तो ये चुपके चुपके यूँ ही हिलते डुलते हैं,
दिल के दरवाज़े हैं आखिर खुलते खुलते, खुलते हैं…!!!!

बाद तेरे किसी का मैनें ध्यान नहीं रखा,
किसी की इज़्ज़त नहीं की,मान नहीं रखा,
यूं तो रहे दस्तरस में कई अजीज़ लोग भी,
मगर बाद तेरे किसी का नाम जान नहीं रखा।

ये किस्सा दिल का है जो बड़ी ख़ामोशी से कहता है,
मेरे लफ़्ज़ों के आईने में सिर्फ तेरा ही चेहरा रहता है…❤️

सुनिए आप मेरे ख्वाहिश-ए -इतवार हो जाइए,
सुबह की मीठी चाय संग अखबार हो जाइए।

ना करीब आ ना तो दूर जा,
ये जो फासला है यही ठीक है,
ना गुज़र हदों से ना हद बता,
ये जो दायरा है यही ठीक है !

मेरे लफ़्ज़ों में जब तू शामिल हुआ,
मेरा लिखा भी पढ़ने के काबिल हुआ ।

मेरे दिल का कागज़ बहुत सादा था साहिबा,
तुझे लिखने के बाद बेशकीमती हो गया…..!

अपनी बर्बादी का साज़ो सामान तैयार कर आओ,
जाओ किसी से इश्क़ का इज़हार कर आओ।😉

रास नहीं अब मुझे गुलों की सुगंध,
मुझको अब तेरी सांसो की
खुशबु ही पसन्द है।

इसमें मेरी नहीं तेरी तौहीन हैं,समझ
प्यासा रहूँ अगर मैं हसीं लब के बाद भी..!

तुम्हे खुद में छिपाना अब तकरीबन नामुमकिन,
छलक पड़ते
हो तुम मेरी हर बात में,मेरे हर एहसास में…!!!!

गहने, कंगन, झुमके, के बिना भी में तुम्हें सजा सकता हूं,
मैं शायर हूं, अपने लफ्जों से ही दुल्हन बना सकता हूं।

चाहने वालों के दिल में हूँ
दुश्मनों के दिमाग में,
मुझे बेघर करने में
तुम्हें कई साल लगेंगे।

यू ही नहीं रहती दिलो में बेचेनिया,
ज़िंदगी से हर पल  समझौतें करने पड़ते हैं……

डुबाने ही बैठा है…..हर शक्स यहाँ,
कोई तो ऐसा दे….ये खुदा जो  दरिया साथ पार कराए…..

फिर कांप रहा है सर्दी से मेरा बदन,
फिर आ पड़ी है तेरी बाहों की ज़रूरत।

सिर्फ बेचैनियाँ लिखी जाती हैं दिल की,
लफ़्जो से कहां पूरी होती है सनम की कमी,!!

जिन लम्हों में तुम ख़ामोशी चाहते हो,
वो पल तुम मेरे साथ काट सकते हो,
जब भी कोई तकलीफ़ हो या परेशानी,
तुम वो जज़्बात मेरे साथ बांट सकते हो,
कभी गुस्से से मन भारी हो जाए तो,
तुम मुझे बेझिझक डाट सकते हो,
मेरा रिश्ता तुम पर कोई बोझ नहीं है,
तुम जब चाहो ये डोर काट सकते हो।।

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